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	<description>LATEST DALIT NEWS</description>
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		<title>स्‍वामी चिन्‍मयानंद पर रेप, गर्भपात के लिए दबाव डालने, हत्‍या के प्रयास का केस</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Dec 2011 07:25:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ. पूर्व केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री स्‍वामी चिन्‍मयानंद पर बलात्‍कार, गर्भपात के लिए दबाव डालने और हत्‍या का प्रयास करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने एक लड़की की शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया है। लड़की बदायूं में रहती है। इससे पहले वह शाहजहांपुर में स्थित स्‍वामी]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ. पूर्व केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री स्‍वामी चिन्‍मयानंद पर बलात्‍कार, गर्भपात के लिए दबाव डालने और हत्‍या का प्रयास करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने एक लड़की की शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया है। लड़की बदायूं में रहती है। इससे पहले वह शाहजहांपुर में स्थित स्‍वामी के आश्रम में कई साल तक रह चुकी है।</p>
<p>अपर महानिदेशक (अपराध) सुबेश कुमार सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर आरोपों की जांच की जा रही है। चिन्‍मयानंद ने आरोपों से इनकार किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया है।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि शिकायत करने वाली लड़की दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय की छात्रा रही चुकी है। उसने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को एक विस्‍तृत चिट्ठी लिख कर चिन्‍मनयानंद के खिलाफ शिकायत भेजी थी। इसमें उन पर हमला करने, बलात्‍कार करने और जान से मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>चिट्ठी मिलने के बाद लड़की को शुरुआती जांच के लिए वरिष्‍ठ अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया। लड़की बुधवार को खुद अफसरों के सामने आई। इसके बाद केस दर्ज कर लिया गया।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि लड़की का कहना है कि जब वह चिन्‍मयानंद के मुमुख आश्रम में रहती थी, तब उसके साथ बलात्‍कार किया गया था। बाद में वह किसी तरह वहां से भाग गई। उसका यह भी कहना है कि जब उसने पुलिस में शिकायत की बात की तो चिन्‍मयानंद ने उसे कथित तौर पर जान से मारने की कोशिश की।</p>
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		<title>केन्द्र और यूपी सरकार के बीच चिट्ठीबाजी में उलझा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Dec 2011 07:16:30 +0000</pubDate>
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				<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। आबादी के अनुपात में मुसलमानों के आरक्षण का मुद्दा केन्द्र व प्रदेश सरकार के बीच चिट्ठीबाजी में उलझ रहा है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मुद्दे को गर्माने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक और पत्र लिखा है। नये पत्र में उन्होने केन्द्र सरकार से मुसलमानों के विकास के लिये ठोस प्रयास]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> आबादी के अनुपात में मुसलमानों के आरक्षण का मुद्दा केन्द्र व प्रदेश सरकार के बीच चिट्ठीबाजी में उलझ रहा है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मुद्दे को गर्माने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक और पत्र लिखा है। नये पत्र में उन्होने केन्द्र सरकार से मुसलमानों के विकास के लिये ठोस प्रयास करने का आग्रह किया है। मायावती ने यह पत्र मनमोहन सिंह के 24 नवंबर को लिखे पत्र के जवाब में भेजा है।</p>
<p>मुसलमानों के आरक्षण के देने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने 24 नवंबर को उप्र की मु यमंत्री को पत्र लिखा था। बुधवार को मायावती ने प्रधानमंत्री के पत्र का उत्तर भेज कर कहा है कि 14 सित बर 2011 को भेजे पत्र में उन्होंने अल्पसंख्यक, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण देने के लिए लिखा था। मायावती ने अपने पत्र में लिखा था कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा आयोग के सिफारिशों के अनुरूप मुसलमानों को आरक्षण दिया जाए।</p>
<p>गौरतलब है कि केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने पिछले दिनों कहा था कि केन्द्र सरकार मुसलमानों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के लिए गंभीर है। इसके बाद यह मुद्दा उप्र के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से जुड़ गया।</p>
<p>नये पत्र में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार अल्पसं यकों, विशेष रूप से मुसलमानो के उत्थान एवं कल्याण के लिये गये कई महत्वपूर्ण फैसलों और चल रही योजनाओं का उल्लेख किया है। जिसमें 1995 से ही विभिन्न चरणों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिये लोक सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था के अन्तर्गत मुसलमानो के पिछड़े को जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की गयी। इसके अलावा 38 जातियों, उप जातियों को अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल करके उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार अल्पसं यकों के कल्याण के लिये अत्यंत संवेदनशील है अल्पसं यक समुदाय के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए मान्यवर श्री कांशीराम जी उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी। अल्पसं यक समुदाय की आलिम इण्टरमीडिएट में पढ़ने वाली बालिकाओं के लिये 25 हजार रूपये की धनराशि एवं नि:शुल्क साईकिल प्रदान किये जाने की व्यवस्था की गयी है।</p>
<p><strong>क्या कहा था प्रधानमंत्री की चिट्ठी ने</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री कार्यालय ने कह दिया है कि मुसलमानों को राज्य सरकार आरक्षण दे सकती है। इस संबंध में देश के दक्षिणी राज्यों का उदाहरण दिया गया है। 24 नवंबर के प्रधानमंत्री कार्यालय से आये पत्र में कहा गया था कि दक्षिण के राज्यों ने अपने विवेक से पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण दिया है। वैसे भी केन्द्र सरकार द्वारा धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाना संविधान के खिलाफ है। प्रधानमंत्री कार्यालय से आये पत्र में सुझाव देते हुए कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकारए आंध्र प्रदेश फामरूले के आधार पर मुसलमानों के आरक्षण की घोषणा कर सकती है।</p>
<p>आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को पिछड़ा घोषित करते हुए इस वर्ग को सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। केरलए तमिलनाडु और कर्नाटक में भी इसी तर्ज पर मुसलमानों को आरक्षण दिया गया है। तमिलनाडु में मुसलमानों और इसाइयों के लिए 3.5 प्रतिशत अलग से कोटा निर्धारित है। दक्षिण के कुछ राज्यों में आरक्षण 50 प्रतिशत से आगे बढ़ गया है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की है।</p>
<p><strong>क्या कहते है मुसलमानों के आरक्षण के समर्थक</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को आरक्षण देने का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। राज्य में 54 प्रतिशत पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है। जो भी सरकार इसमें पिछड़े मुसलमानों का आरक्षण का कोटा तय करेगी उसे बाकी की नराजगी का सामना करना पड़ेगा। लिहाजा आरक्षण का मुद्दा केन्द्र व प्रदेश एक दूसरे के पाले में फेंक रहें है। आल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के अध्यक्ष डा.एम ए सिद्दिकी ने कहा कि हमें धर्म के आधार पर आरक्षण नही चाहिए।</p>
<p>हमें तो पिछड़े व दलित मुसलमानों के कोटे का हिस्सा चाहिए। उन्होने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण की संविधान में व्यवस्था नही है। उप्र की मुख्यमंत्री यदि आबादी के लिहाज से आरक्षण की बात करती है तो ठीक नही है यह गुमराह करने जैसा है। गौरतलब है कि  प्रदेश में मुसलमानों की जनसं या लगभग 18 प्रतिशत है। विधानसभा की कुल 403 सीटों में से करीब 100 सीटों पर यह निर्णायक की भूमिका में हैं।</p>
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		<title>यहां जूठे पत्तलों पर लोटते हैं दलित, मायावती ने जताया कड़ा विरोध</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Dec 2011 07:04:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश की खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[दलित खबरें]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कर्नाटक में आस्था के नाम पर अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा जूठे पत्तलों पर लोट लगाये जाने की प्रथा की कड़े शब्दों में भत्र्सना की है। उन्होंने इस शर्मनाक प्रथा पर तत्काल प्रतिबंध लगाये जाने की मांग करते हुए कहा कि चर्म रोगों के उपचार के नाम पर इस]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> की मुख्यमंत्री मायावती ने कर्नाटक में आस्था के नाम पर अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा जूठे पत्तलों पर लोट लगाये जाने की प्रथा की कड़े शब्दों में भत्र्सना की है। उन्होंने इस शर्मनाक प्रथा पर तत्काल प्रतिबंध लगाये जाने की मांग करते हुए कहा कि चर्म रोगों के उपचार के नाम पर इस प्रथा का जारी रहना बेहद अमानवीय और अपमानजनक है। कर्नाटक सरकार को इस अमानवीय प्रथा को तत्काल प्रतिबंधित कर देना चाहिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कर्नाटक में जारी इस शर्मनाक प्रथा को भारतीय संविधान के समानता के अधिकारों के विपरीत बताते हुए कहा कि इलाज के बहाने जातिवादी मानसिकता में जकड़े हुए तत्व अनुसूचित जाति के लोगों की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलितों का सामाजिक शोषण करने वाली इस प्रथा के बारे में जानकारी होने पर यह विश्वास ही नहीं होता कि यह घृणित कार्य स्वतंत्र भारत में 21वीं सदी के दौरान भी बेरोक-टोक होने दिया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा निन्दनीय यह है कि मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग सहित देश के किसी भी वर्ग ने अभी तक इस प्रथा के खिलाफ कोई नहीं बोला। एक हिन्दी चैनल में पिछले वर्ष जब इसकी खबर आई तो देश में पहली बार मैंने ही इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई। लेकिन खेद का विषय है कि कर्नाटक सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी और मंगलवार को दक्षिण कन्नड़ जिले में बैंगलूरू से लगभग 115 किलोमीटर दूर एक मंदिर में इस प्रथा की फिर पुनरावृत्ति हुई।</p>
<p>पिछले वर्ष की ही भांति इस वर्ष भी इस प्रथा के खिलाफ किसी ने आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि यह प्रथा न केवल अमानवीय है अपितु भारतीय संविधान की मूल भावना के पूर्णतः प्रतिकूल है। इसलिए कर्नाटक सरकार को इस अमानुषिक प्रथा को अविलम्ब प्रतिबंधित कर अपने संवैधानिकदायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।</p>
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		<title>दलित उत्पीडऩ में पांच गिरफ्तार</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Nov 2011 11:19:39 +0000</pubDate>
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				<category><![CDATA[दलित खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[बयाना &#124; पुलिस ने अलग-अलग थानों में दर्ज दलित उत्पीडऩ के मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार गढीबाजना थाना पुलिस ने मारपीट के आरोपी गोविंद, तेज सिहं, अर्जुन, राजेन्द्र गुर्जर निवासी गजनुआ को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ गजनुआ निवासी अजय सिहं जाटव ने 8 अगस्त को मारपीट कर जाति सूचक]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बयाना | पुलिस ने अलग-अलग थानों में दर्ज दलित उत्पीडऩ के मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार गढीबाजना थाना पुलिस ने मारपीट के आरोपी गोविंद, तेज सिहं, अर्जुन, राजेन्द्र गुर्जर निवासी गजनुआ को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ गजनुआ निवासी अजय सिहं जाटव ने 8 अगस्त को मारपीट कर जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने का मामला थाना गढीबाजना पर दर्ज कराया था। इस प्रकार कमालपुरा निवासी फूल सिंह पुत्र धनीराम ने फरवरी में दलित उत्पीडऩ का मामला भुसावर थाना में दर्ज कराया था, जिसमें कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मंगलवार को कमलापुरा निवासी गोपाल पुत्र कमल सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस इससे पूर्व तीन आरोपियों बलवीर पुत्र कमल सिंह, अशोक पुत्र बलवीर व मुकेश पुत्र बलवीर को गिरफ्तार कर चुकी है।</p>
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		<title>थाने में भिड़े दो पक्ष, शांतिभंग में बंदी</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Nov 2011 11:11:59 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[बरला : रहमापुर गांव में एक विवादित भूखंड के मामले का निस्तारण करने थाने पहुंचे दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। पुलिस ने दोनों ओर से एक-एक प्रमुख व्यक्ति को शांतिभंग के आरोप में बंदी बना लिया। रहमापुर गांव में एक भूखंड को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रधान निष्काम शर्मा का आरोप है कि]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p>बरला : रहमापुर गांव में एक विवादित भूखंड के मामले का निस्तारण करने थाने पहुंचे दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। पुलिस ने दोनों ओर से एक-एक प्रमुख व्यक्ति को शांतिभंग के आरोप में बंदी बना लिया।</p>
<p>रहमापुर गांव में एक भूखंड को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रधान निष्काम शर्मा का आरोप है कि यह जमीन ग्राम पंचायत की है और गांव का ही दलित रेशमपाल उस पर कब्जे का प्रयास कर रहा है। इस मामले के निस्तारण के लिए दोनों पक्ष सोमवार को थाने पहुंचे। वहां बातचीत के दौरान दोनों पक्ष आपस में भिड़ गये। यह देखकर पुलिस ने रेशमपाल और निष्काम शर्मा को शांतिभंग करने के आरोप में बंदी बना लिया। विदित हो कि जमी का मामला तहसीलदार की कोर्ट में विचाराधीन है।</p>
<p>महिला को पीटा</p>
<p>जलाली : कस्बे के गांव साहजहांपुर ताजपुर में एक महिला के साथ घर में घुसकर दो लोगों ने मारपीट करदी, जिससे महिला घायल हो गई। गुड्डी देवी पत्नी अनिल कुमार निवासी साहजहांपुर अपने घर में थी। उसका आरोप है कि कुछ लोग घर में घुस आए और गुड्डी के साथ मारपीट करदी। इसे देख महिला के दोनों छोटे बच्चे रोने लगे। गुड्डी का कहना है कि मारपीट करने वाले उसके कान के कुंडल व 5000 नगदी छीनकर ले गए। महिला के ससुर हर प्रसाद ने साहब सिंह और वीर पाल निवासी अमीनाबाद के खिलाफ दर्ज कराई है।</p>
</div>
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		<title>उत्‍तर प्रदेश में मायावती के 50-50 चांस</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Nov 2011 11:07:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश की खबरें]]></category>
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		<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश में चार बार बसपा का परचम लहराकर इतिहास रचने वाली प्रदेश की वर्तमान मुख्‍यमंत्री मायावती इस बार भी अपना वर्चस्‍व कायम रखने के लिये हर सियासी दाव पेंच कर रही हैं। मायावती ने पार्टी के चुनाव अभियान को हमेशा अपने हाथ में रखते हुए लंबे अरसे तक यूपी में कबिज रहे कांग्रेस के]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>उत्‍तर प्रदेश में चार बार बसपा का परचम लहराकर इतिहास रचने वाली प्रदेश की वर्तमान मुख्‍यमंत्री मायावती इस बार भी अपना वर्चस्‍व कायम रखने के लिये हर सियासी दाव पेंच कर रही हैं। मायावती ने पार्टी के चुनाव अभियान को हमेशा अपने हाथ में रखते हुए लंबे अरसे तक यूपी में कबिज रहे कांग्रेस के साथ ही साथ सपा और भाजपा को जड़ से उखाड़ फेंका है। दलितों की मसीहा के रूप में खुद को स्‍थापित कर मायावती ने इस बार ब्राहम्‍णों को अपना तुरूप का इक्‍का बनाया है। ऐसे में अब देखना यह है कि मायावती की यह नई चाल उसे सत्‍ता में काबिज होने देती है या फिर उन्‍हें बैकफुट पर ला देती है। यूपी के परिप्रेक्ष्‍य में प्रस्‍तुत है मायावती का परिचय-</p>
<p>मायावती का पुरा नाम मायावती नैना कुमारी है। उनका जन्म 1956 में नई दिल्ली में प्रभु दास और उनकी पत्‍नी रामरती के यहां हुआ। मायावती के पिता प्रभु भारतीय डाक-तार विभाग से वरिष्ठ लिपिक के रूप में सेवा निवृत्त हुए। उनकी मां हालांकि अनपढ़ थीं, परंतु उन्होंने अपने सभी बच्चों की शिक्षा में रुचि ली और सबको योग्य भी बनाया। मायावती के 6 भाई और 2 बहनें हैं। माया का पैतृक गांव बादलपुर है, जो उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित है। मायावती ने दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की है।</p>
<p>उनके पास शिक्षा स्नातक की उपाधि भी है और इन्होंने दिल्ली में (इन्द्रपुरी जे जे कॉलोनी) में एक शिक्षक के रूप में भी तब तक कार्य किया, जब तक इन्होंने पूरी तरह राजनीति में आने का निर्णय नहीं ले लिया। एक समय उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं के लिए भी अध्ययन किया था, लेकिन 1977 में कांशीराम से मिलने के बाद इन्होंने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय ले लिया। कांशीराम के संरक्षण के अंतर्गत वह उनकी उस कोर टीम का हिस्सा थीं, जब1984 में उन्होंने बसपा की स्थापना की थी।</p>
<p><strong>राजनीतिक कैरियर</strong></p>
<p>मायावती ने अपना पहला चुनाव उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर के कैराना लोकसभा सीट से लड़ा था। वह अविवाहित हैं और अपने समर्थकों में &#8216;बहनजी&#8217; के नाम से जानी जाती हैं। मायावती ने चौथी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लखनऊ के राजभवन में 13 मई 2007 को शपथ ग्रहण की थी। मायावती इससे पहले भी 1995 से लेकर 2003 के बीच तीन बार छोटे कार्यकाल के लिए उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। मायावती पहली दलित महिला हैं, जो भारत के किसी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं हैं।</p>
<p><strong>यूपी चुनाव और मायावती</strong></p>
<p>उत्‍तर प्रदेश चुनाव की बात करें तो मायावती उस तराजू पर बैठी हैं, जिसका पलड़ा कभी ऊपर कभी नीचे हो रहा है। जब-जब लोग लखनऊ और ग्रेटर नोएडा की तरफ देखते हैं, तब-तब यही दिल करता है कि एक बार फिर मायावती को सीएम बना दें, लेकिन जब नजर युवाओं और गरीब किसानों की तरफ जाती है या उन फैक्ट्रियों की तरफ जाती है, जो उनके कार्यकाल में बंद हो गईं, तो मन कचोट सा जाता है। एक तरफ लगता है कि प्रदेश का बंटवारा कर मायावती सभी को विकास की मुख्‍यधारा से जोड़ सकेंगी, लेकिन दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी 100 घोटालों की पुस्‍तक पढ़कर दिमाग विचलित हो जाता है।</p>
<p>मायावती जब दलित, ब्रह्मण, मुस्लिम और वैश्‍य समाज की बात करती हैं, तो लगता है कि वो कभी भी जातिवाद की राजनीति से ऊपर नहीं उठ पायेंगी, लेकिन बात जब खुदरा बाजार में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश और परिवारवाद की खिलाफत की आती है तो मन करता है मायावती का ही साथ दें। भ्रष्‍टाचार की बात करें तो जब मायावती अपने दल से किसी भ्रष्‍ट नेता को निकला बाहर करती हैं, तो लोग उनकी ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन पार्टी की साख दांव पर लगने पर जब वही नेता वापस आ जाते हैं तो लगता है माया सरकार पूरी तरह भ्रष्‍ट है।</p>
<p>ऐसे ही विचार इस समय यूपी की जनता के मन में घूम रहे हैं। खैर इस समय यह कहना तो काफी मुश्किल होगा कि इन्‍हें वोट दिया जाये या नहीं, लेकिन सच पूछिए तो रोजगार की दिशा में विकास नहीं देखकर और राज्‍य में मल्‍टीनेशनल कंपनियों के नहीं आने पर यहां के युवा का मन खट्टा जरूर है।</p>
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		<title>अत्याचारों के खिलाफ दिया ज्ञापन</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Nov 2011 11:04:06 +0000</pubDate>
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				<category><![CDATA[दलित खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार देश  से ]]></category>

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		<description><![CDATA[राजसमंद। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भील समाज के लोगों ने सोमवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। समाज के लोगों ने भीलों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने एवं हाल में केलवाड़ा थाना क्षेत्र के गुंदाली में एक भील की संदिग्ध परिस्थियों में हुई मौत की जांच]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>राजसमंद। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भील समाज के लोगों ने सोमवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। समाज के लोगों ने भीलों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने एवं हाल में केलवाड़ा थाना क्षेत्र के गुंदाली में एक भील की संदिग्ध परिस्थियों में हुई मौत की जांच कराने व हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की। भारतीय महासभा, राजस्थान किसान सभा, राजस्थान किसान संगठन व दलित सेना के संयुक्त तत्वावधान में विशाल रैली का आयोजन किया गया।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>मायावती ने कहा बंद हो दलितों के जूठे पत्तलों पर लोटने की प्रथा</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Nov 2011 11:02:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश की खबरें]]></category>
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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कर्नाटक में आस्था के नाम पर किए जा रहे शर्मनाक कृत्य को बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर दलितों के जूठे पत्तलों पर लोटना बेहद शर्मनाक है और इसे तत्काल बंद कर देना चाहिए। बता दें कि कर्नाटक में चर्म रोगों के]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कर्नाटक में आस्था के नाम पर किए जा रहे शर्मनाक कृत्य को बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर दलितों के जूठे पत्तलों पर लोटना बेहद शर्मनाक है और इसे तत्काल बंद कर देना चाहिए। बता दें कि कर्नाटक में चर्म रोगों के उपचार के नाम पर दलित जूठे पत्तलों पर लोटते हैं, उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके रोग दूर हो जाएंगे। मुख्यमंत्री मायावती ने कहा इस प्रथा के अंतर्गत दलितों का जूठे पत्तलों पर लोटना बेहद अमानवीय और अपमानजनक है और इस प्रथा पर कर्नाटक सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगा देना चाहिए। मुख्यमंत्री मायावती ने यह भी कहा कि संविधान में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है और कर्नाटक में जारी यह प्रथा उन अधिकारों के विपरीत है और इलाज के बहाने जातिवादी मानसिकता में जकड़ी हुयी है। उन्होंने बताया कि उससे भी ज्यादा निंदनीय बात तो यह है कि मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सहित देश के किसी भी आयोग या वर्ग ने इस शर्मनाक प्रथा के खिलाफ कोई आवाज़ बुलंद नहीं की।</p>
<p>मायावती ने जारी अपने एक बयान में यह भी कहा कि जब उन्होंने एक समाचार चैनल पर इस तरह की ख़बर देखी थी तो वह बहुत आहत हुयीं थी और देश में सबसे पहले इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ आवाज़ उठाई थी परंतु कर्नाटक सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और मंगलवार को दक्षिण कन्नड़ जिले में बैंगलूर से लगभग 115 किलोमीटर दूर एक मंदिर में यह प्रथा दोबारा दोहरायी गयी। उन्होंने बताया कि तब से लेकर अब तक किसी ने भी इस शर्मनाक प्रथा को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।</p>
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		<title>घर में रोटी नहीं इसलिए बेचते हैं बेटियां</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 06:33:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
				<category><![CDATA[दलित उत्पीडऩ]]></category>
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		<description><![CDATA[वाराणसी। दामाद का नाम क्या है? साहब नहीं पता। दामाद कहां का रहने वाला है? साहब, दूर किसी जिले का है&#8230;। उसका घर-गांव देखे हो? नहीं साहब&#8230; उन्होंने खुद आकरतीन रोज पहले लड़की देखी और दूसरे दिन शादी कर ली&#8230;। यह तो जानते ही होगे कि किस बिरादरी का है दामाद? नहीं साहब, यह भी]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>वाराणसी। दामाद का नाम क्या है? साहब नहीं पता। दामाद कहां का रहने वाला है? साहब, दूर किसी जिले का है&#8230;। उसका घर-गांव देखे हो? नहीं साहब&#8230; उन्होंने खुद आकरतीन रोज पहले लड़की देखी और दूसरे दिन शादी कर ली&#8230;। यह तो जानते ही होगे कि किस बिरादरी का है दामाद? नहीं साहब, यह भी नहीं पूछे&#8230; हम लोग गरीब हैं&#8230; लड़की का ब्याह हो जाए यही बहुत है हमारे लिए&#8230;। लड़की देने के एवज में पैसा लिए हो? ज्यादा नहीं साहब, केवल 38 सौ रुपये दिए थे लड़के वालों ने&#8230;। बाकी बिचौलिया को दिए होंगे तो हमको नहीं मालूम&#8230;।<br />
यह सवाल और जवाब सोमवार दोपहर शिवपुर थाने में एसओ राजकुमार सिंह और उस लड़की निर्मला के मां-बाप के बीच हो रहा था जिसे गरीबी के चलते महज 38 सौ रुपये लेकर बुलंदशहर के अनजान युवक से ब्याह दिया गया। अमर उजाला में सोमवार को खबर छपने पर एसपी सिटी मान सिंह चौहान के आदेश पर एसओ शिवपुर ने पिसौरी गांव की दलित युवती निर्मला के पिता पारस को पूछताछ के लिए बुलाया था। निर्मला से ब्याह रचाने वाले बुलंदशहर में गुलाबडीह इलाके के प्रवीण कुमार जाट को उसके मामा पिंटू समेत शनिवार दोपहर पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था। स्थानीय महिला लालमती सोनकर का आरोप है कि प्रवीण ने बिचौलियों के जरिए शादी के लिए निर्मला को खरीदा था। पैसों के चक्कर में ही निर्मला के गरीब मां-बाप ने बिना कुछ पूछे-जांचे बेटी प्रवीण के हवाले कर दी। इसीलिए उन्होंने प्रवीण को पकड़ा कि पुलिस पता तो लगाए कि वह अपराधी तो नहीं।<br />
थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने अमर उजाला को बताया कि जांच-पड़ताल से पता चला कि पश्चिमी यूपी और हरियाणा के तमाम जिलों में जाट बिरादरी में लड़कियों की बेहद कमी हो गई है। शादी के लिए युवकों को दूसरे राज्यों में जाकर गरीब लड़कियों के घरवालों से मोलभाव करना पड़ता है। बनारस के भी कई इलाकों में जाट बिरादरी के सैकड़ों युवकों ने बिचौलियों के जरिये गरीब परिवार की लड़कियों से ब्याह रचाया है। यह भी सच है कि ज्यादातर लड़कियां दलित हैं जिनके मां-बाप दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पाते तो भला शादी के लिए पैसे कहां से लाएंगे। इसी मजबूरी में वे आंख मूंदकर बेटियों को अनजान युवकों के साथ ब्याह देते हैं। यह अपराध से ज्यादा सामाजिक समस्या है। इसलिए अफसरों से सलाह-मशविरा के बाद पकडे़ गए युवक प्रवीण जाट समेत दोनों लोगों को छोड़ दिया गया।</p>
<p>लड़कियों की कमी से बिचौलियों की चांदी<br />
वाराणसी। पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़, बागपत, एटा, मेरठ समेत कई जिलों में जाट समेत कुछ बिरादरियों में विवाह योग्य लड़कियों की कमी के कारण पूर्वांचल में सक्रिय बिचौलियों की चांदी है। पकड़े गए प्रवीण जाट ने बताया कि उसके तमाम परिचितों ने बनारस के साथ ही आसपास के भी जिलों की गरीब लड़कियों से शादी की है। बिचौलिए पांच से 20 हजार रुपये लेकर लड़की दिखाते हैं। ये बिचौलिए पश्चिमी यूपी के जिलों में जाते रहते हैं। प्रवीण के मुताबिक, बुलंदशहर में वह सौ से ज्यादा लोगों को जानता हैं जिन्होंने इधर आकर पैसे खर्च किए और ब्याह रचाया।</p>
<p>कर दी शादी, बोझ तो हटा<br />
वाराणसी। अमर उजाला टीम को छानबीन के दौरान शिवपुर और बड़ागांव में ऐसे दर्जन भर परिवारों के बारे में पता चला जिन्होंने अपनी बेटियों को पश्चिमी यूपी और हरियाणा के उन युवकों से ब्याह दिया जिनके बारे में वे कुछ भी नहीं जानते हैं। मामला गर्माने पर इन परिवारों को बदनामी का भय सताने लगा इसलिए उन्होंने नाम तो नहीं बताया अलबत्ता बातचीत में यह जरूर कहा कि वे किसी तरह गरीबी में गुजर-बसर कर रहे हैं। बेटी के ब्याह की चिंता बनी रहती है। बिचौलिए बाहर के लड़के लाते हैं, देखने में ठीक रहते हैं और कुछ पैसे देते हैं तो ब्याह कर देते हैं। सिर से बोझ उतर जाता है।</p>
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		<title>पेट्रोल डालकर घर फूंका, चार झुलसे</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 06:25:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator>yourdalits</dc:creator>
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		<description><![CDATA[कानपुर। चकेरी के सिद्धनाथ घाट मंदिर के हाते में रविवार देर रात सीमेंट टिन शेड वाले घर के भीतर सो रहे पांच लोगों को पेट्रोल डालकर जिंदा फूंकने की कोशिश की गई। आग से गृहस्वामी की तीन बेटियां और एक बेटा झुलस गया और गृहस्थी राख हो गई। बरामदे में सो रही पत्नी और एक]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>कानपुर। चकेरी के सिद्धनाथ घाट मंदिर के हाते में रविवार देर रात सीमेंट टिन शेड वाले घर के भीतर सो रहे पांच लोगों को पेट्रोल डालकर जिंदा फूंकने की कोशिश की गई। आग से गृहस्वामी की तीन बेटियां और एक बेटा झुलस गया और गृहस्थी राख हो गई। बरामदे में सो रही पत्नी और एक बेटा सकुशल बच गया। पत्नी ने पड़ोसी रिक्शा कंपनी के संचालक पर आग लगाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने झुलसे लोगों को उर्सला में भर्ती कराया है जहां दो की हालत गंभीर है। वहीं, महिला के पति के अस्पताल से गायब होने से मामला उलझ गया है। पता चला है कि पति एक महीने से घर से अलग रह रहा था। इसलिए उस पर भी शक है।<br />
हाते में टेनरी कर्मचारी दलित हरीराम टिन शेड में रहता है। परिवार में पत्नी इलायची देवी, बेटी माया (24) ममता (20), सुनीता (18) और बेटे बाबू (22),राजू (15) हैं। माया एमबीए कर रही है और जेड स्क्वायर में सेल्समैन है। इलायची ने बताया कि रविवार रात वह बरामदे में सो रही थी। पति मंदिर के चबूतरे पर सोए थे। कमरे में पांचों बच्चे सो रहे थे। रात करीब डेढ़ बजे ममता की चीख पर वह जागी तो दरवाजे और बेड पर आग लगी थी। पहले खुद आग बुझाने की कोशिश की। शोर सुनकर पड़ोसी भी आए तब आग पर काबू पाया गया। आग से माया, ममता, बाबू और सुनीता गंभीर रूप से झुलस गए। बेटे राजू ने बताया कि वह कमरे में सो रहा था आग देख बाहर भागा तो बच गया। इलायची देवी ने बताया कि आग से पचास हजार की गृहस्थी जलकर राख हो गई। उन्होंने पड़ोसी पप्पू पर आरोप लगाया कि वह उनके दरवाजे के सामने जमीन पर कब्जा करना चाहता है। इसी को लेकर उनका उससे झगड़ा चल रहा है। पंद्रह दिन पहले उसने देख लेने की धमकी दी थी। उन्हें शक है कि आग पप्पू ने ही लगाई है। पति पर शक के मामले में इलायची देवी ने बताया कि पति को यदि मारना होता तो वे उसे मारते न कि बच्चों को। चकेरी थानाप्रभारी ने बताया कि पप्पू को हिरासत में ले लिया गया है। पूछताछ की जा रही है। पर, हरीराम के न मिलने से मामला उलझा है। उसकी तलाश की जा रही है।</p>
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